साहित्य का स्वधर्म लेबल वाली कोई पोस्ट नहीं. सभी पोस्ट दिखाएं
साहित्य का स्वधर्म लेबल वाली कोई पोस्ट नहीं. सभी पोस्ट दिखाएं
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
लोकप्रिय पोस्ट
-
विवेकी राय हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं. इस विधा में उनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदि, विद्यानिव...
-
कुबेरनाथ राय खांटी भारतीय चिंतक रहे हैं। उनके लेखन और मानसिक संस्कार दोनों में भारतीयता कूट-कूट कर भरी हुई है। लेकिन वे आधुनिक विश्व-चिंतन...
-
आओ बच्चों सुनो कहानी बात नहीं है बहुत पुरानी l अंग्रेजों का बड़ा तमाशा गिट फिट गिट पिट उनकी भाषा ll बात-बात पर हमें डराते अंग्रेजी का धौं...
-
गांव की ईट की इन भट्ठियों में रहकर उनकी तपन सहकर और फिर भी इन घरों के प्रति अथाह राग रखकर हम डार्विन के श्रेष्ठतम की उत्तर जीविता को निरंतर ...
-
भारतीय परंपरा सृष्टि के कण-कण में ईश्वर का निवास मानती है । समूची सृष्टि में ईश्वर के निवास का अर्थ है इस समूची सृष्टि के प्रति ईश्वर के स...
-
हिंदी दिवस पर हिंदी के संवैधानिक अधिकार, अन्य भारतीय भाषाओं के बीच स्वीकृति-अस्वीकृति के साथ अंग्रेजी के पैरोकारों की चर्चा खूब होती है। ये ...
-
बैशाख फिर आ गया। यह जब भी आता है तो मेरे लिए अपनी झोली में उल्लास भर लाता है। बैशाख और उल्लास ! अजीब बात है न। दुनिया जहाँ को तो सारा राग-र...
-
हम भारत के नए प्रणेता नई क्रांति हम लाएंगे l घर-घर शिक्षा दीप जलाकर अपना फर्ज निभाएंगे नहीं रहेगा एक निरक्षर विश्व गुरु कहलाएंगे ll हम भ...
-
हे भारत के प्रथम पूज्य ! हे वीर पुत्र धरती के ! प्राण वायु तुम , महाकाय इस भारत की संस्कृति के । सुप्त धरा में जीवन-रस के संचारक , ...
-
कृष्ण स्वयं माधुर्य रुप हैं। उनका सौंदर्य और सम्मोहन अद्वितीय है, लेकिन उनकी की सौन्दर्य दृष्टि उससे भी अनूठी है। कहां कृष्ण का कोमल मधुर व्...